सरकारी और प्राइवेट स्कूल 6-7 जुलाई को रहेंगे बंद, छुट्टी का सरकारी एलान

6 और 7 जुलाई को पूरे देश में स्कूल बंद-Public Holiday Declared

नई दिल्ली – भारत सरकार ने पूरे देश में 7 जुलाई 2025 को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। यह छुट्टी इस्लामी नव वर्ष और मुहर्रम के मौके पर दी जाएगी। हालांकि अवकाश की सही तारीख़ अब भी पूरी तरह तय नहीं है। यह चांद दिखने पर निर्भर करेगी। अगर चांद 6 जुलाई को नहीं दिखा, तो छुट्टी अगले दिन 7 जुलाई को दी जाएगी। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वे कोई भी जरूरी काम प्लान करने से पहले छुट्टी की सही तारीख का इंतजार करें।

सरकारी कैलेंडर में 6 जुलाई दर्ज, लेकिन बदलाव संभव

फिलहाल केंद्र सरकार के छुट्टी कैलेंडर में मुहर्रम के लिए 6 जुलाई को अवकाश दिखाया गया है। लेकिन एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह तारीख चांद के दीदार के बाद बदली भी जा सकती है। यदि चांद 6 तारीख को नहीं दिखता, तो सार्वजनिक छुट्टी 7 जुलाई को प्रभावी होगी। इस स्थिति को देखते हुए लोगों से कहा गया है कि वे अपने जरूरी काम पहले ही निपटा लें, ताकि आखिरी समय में कोई दिक्कत न हो।

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इन सेवाओं पर असर पड़ेगा—बंद रहेंगे स्कूल और बैंक

मुहर्रम की छुट्टी पर देशभर में कई प्रमुख सेवाएं बंद रहेंगी। स्कूल-कॉलेज, सरकारी और निजी कार्यालय, डाकघर और बैंक इस दिन काम नहीं करेंगे। यदि आपको चेक जमा करना है, लोन भुगतान करना है या कोई अन्य बैंकिंग कार्य करना है, तो उसे 6 जुलाई से पहले निपटा लेना ही समझदारी होगी। छुट्टी का असर कई राज्यों में शनिवार या रविवार के साथ जुड़कर लंबा वीकेंड भी बना सकता है।

ये सेवाएं रहेंगी चालू—इमरजेंसी में नहीं होगी रुकावट

हालांकि कुछ जरूरी सेवाएं इस छुट्टी में भी सामान्य रूप से चालू रहेंगी। इनमें सरकारी और निजी अस्पताल, फार्मेसी, एम्बुलेंस, पुलिस, फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा रेलवे, एयरलाइन और बस सेवाएं पूर्व निर्धारित समय के अनुसार ही चलेंगी। मेट्रो, ऑटो और टैक्सी सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी, हालांकि कुछ शहरों में इनकी संख्या कम हो सकती है। निजी संस्थानों में छुट्टी न होने की संभावना भी जताई जा रही है।

मातम और श्रद्धा का दिन—शिया मुस्लिम समुदाय के लिए खास

मुहर्रम खासकर शिया मुस्लिम समुदाय के लिए गहरे शोक और श्रद्धा का दिन होता है। इस दिन कर्बला की लड़ाई में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है। देश के कई हिस्सों में ताजिए और मातमी जुलूस निकाले जाते हैं। लोग काले कपड़े पहनते हैं और शांति के साथ शोक जताते हैं। साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी किए जाते हैं, जिनमें समाज के कई वर्ग हिस्सा लेते हैं।

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मुहर्रम का धार्मिक महत्व—‘आशूरा’ की गूंज

मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना होता है और इसे सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है। इस महीने का 10वां दिन ‘आशूरा’ कहलाता है। इतिहास में यह दिन 680 ईस्वी की उस जंग से जुड़ा है, जिसमें इमाम हुसैन ने न्याय और धर्म के लिए अपनी जान कुर्बान की थी। इस मौके पर शिया मुसलमान ताजिए निकालते हैं, मजलिस करते हैं और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हैं। यह दिन सामाजिक एकता, त्याग और धार्मिक समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।

रविवार से जुड़कर लंबा वीकेंड—अब क्या करें?

क्योंकि यह छुट्टी वीकेंड के आस-पास आ रही है, इसलिए कई लोग इसे लंबी छुट्टी में बदल सकते हैं। ऐसे में सलाह दी जा रही है कि लोग जरूरी कार्य जैसे ऑनलाइन बुकिंग, दवाइयों की खरीदारी, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और यात्रा की योजना पहले से बना लें। चूंकि बैंक 6 या 7 जुलाई को बंद हो सकते हैं, इसलिए फाइनेंशियल कामकाज 5 जुलाई तक ही पूरे कर लें।

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समाज, धर्म और सरकार तीनों के लिए अहम दिन

भारत जैसे विविधता भरे देश में मुहर्रम की छुट्टी धार्मिक सद्भाव और प्रशासनिक सजगता दोनों का उदाहरण है। सरकार ने इस दिन को अवकाश घोषित कर लोगों की भावनाओं का सम्मान किया है, साथ ही सावधानी बरतने की सलाह देकर जिम्मेदारी भी दिखाई है। अब देखना यह है कि चांद किस दिन दिखाई देता है, और आखिरकार देश को किस दिन की छुट्टी मिलती है—6 या 7 जुलाई?

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